त्रिभिर्गुणमयैर्भावैरेभिः सर्वमिदं जगत् मोहितं नाभिजानाति मामेभ्यः परमव्ययम्
गुणों के कार्यरूप सात्त्विक, राजस और तामस—इन तीनों प्रकार के भावों से यह सब संसार—प्राणी-समुदाय मोहित हो रहा है, इसीलिये इन तीनों गुणों से परे मुझ अविनाशी को नहीं जानता |
संसार के हर कण में ईश्वरीय शक्ति और दिव्यता का अनुभव करें, भ्रम और अहंकार स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
