Bhagavad Gītā · 1.12
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️कौरवों में वृद्ध बड़े प्रतापी पितामह भीष्म ने उस दुर्योधन के हृदयमें हर्ष उत्पन्न करते हुए उच्च स्वर से सिंह की दहाड़ के समान गरजकर शंख बजाया |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है।