Bhagavad Gītā · 2.9
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
सञ्जय उवाच एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप न योत्स्य इति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️सज्जय ने कहा—हे राजन! निःश्रा को जीतने वाले अर्जुन अन्तर्मी श्रीकृष्ण महाराज के प्रति इस प्रकार कहकर फिर श्रीगोविन्द भगवान् से 'युद्ध नहीं करूँगा' यह स्पष्ट कहकर चुप हो गये |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।