Bhagavad Gītā · 2.8
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
न हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद्यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम् अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धंराज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️क्योंकि भूमि में निःस्फुटक, धन-धान्य सम्पत्र राज्य और देवताओं के स्वामीपने को प्राप्त होकर भी मैं उस उपाय को नहीं देखता हूँ, जो मेरी इन्द्रियों के सुखाने वाले शोक को दूर कर सके|
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।