Bhagavad Gītā · 2.72
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️हे अर्जुन! यह ब्रह्म को प्राप्त पुरुष की स्थिति है, इसको प्राप्त होकर योगी कभी मोहित नहीं होता और अन्त काल में भी इस ब्राह्मी स्थिति में स्थित होकर ब्रह्मानन्द को प्राप्त हो जाता है |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।