Bhagavad Gītā · 2.70
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठंसमुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वेस शान्तिमाप्नोति न कामकामी
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️जैसे नाना नदियों के जल सब ओर से परिपूर्ण, अचल प्रतिष्ठा वाले, समुद्र में उसको विचलित न करते हुए ही समा जाते हैं, वैसे ही सब भोग जिस स्थितप्रज्ञ पुरुष में किसी प्रकार का विकार उत्पन्न किये बिना ही समा जाते हैं, वही पुरुष शान्ति को प्राप्त होता है, भोगों को चाहने वाला नहीं |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱जैसे नदियाँ समुद्र में मिलकर उसे विचलित नहीं कर पातीं, वैसे ही सभी इच्छाओं के बीच जो शांत रहता है, वही सच्ची शांति पाता है।