Bhagavad Gītā · 2.68
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️इसलिए हे महाबाहो! जिस पुरुष की इन्द्रियाँ इन्द्रियों के विषयों से सब प्रकार निग्रह की हुई हैं, उसी की बुद्धि स्थिर है |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।