Bhagavad Gītā · 2.67
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️क्योंकि जैसे जल में चलने वाली नाव को वायु हर लेती है, वैसे ही विषयों में विचरती हुई इन्द्रियों में से मन जिस इन्द्रिय के साथ रहता है वह एक ही इन्द्रिय इस अयुक्त पुरुष की बुद्धि को हर लेती है |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।