Bhagavad Gītā · 2.66
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️न जीते हुए मन और इन्द्रियों वाले पुरुष में निश्चयात्मक बुद्धि नहीं होती और उस अयुक्त मनुष्य के अन्तःकरण में भावना भी नहीं होती तथा भावनाहीन मनुष्य को शान्ति नहीं मिलती और शान्तिरहित मनुष्य को सुख कैसे मिल सकता है ? | सम्पूर्ण प्राणियों के लिये जो रात्रि के समान है, उस नित्य ज्ञानस्वरूप परमानन्द की प्राप्ति में स्थितप्रज्ञ योगी जागता है और जिस नाशवान् सांसारिक सुख की प्राप्ति में सब प्राणी जागते हैं, परमात्मा के तत्व को जानने वाले मुनि के लिये वह रात्रि के समान है |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।