Bhagavad Gītā · 2.61
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️इसलिए साधक को चाहिये कि वह उन सम्पूर्ण इन्द्रियों को वश में करके समाहित चित हुआ मेरे परायण होकर ध्यान में बैठे; क्योंकि जिस पुरुष की इन्द्रियाँ वश में होती हैं, उसी की बुद्धि स्थिर हो जाती है |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।