Bhagavad Gītā · 2.60
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️हे अर्जुन ! आसक्ति का नाश न होने के कारण ये प्रमथन स्वभाव वाली इन्द्रियाँ यत करते हुए बुद्धिमान् पुरुष के मन को बलात्कार से हर लेती हैं |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।