Bhagavad Gītā · 2.62
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष की उन विषयों में आसक्ति हो जाती है, आसक्ति से उन विषयों की कामना उत्पन्न होती है और कामना में विफल पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱विषयों का निरंतर चिंतन आसक्ति पैदा करता है, आसक्ति से कामना और कामना में बाधा आने पर क्रोध उत्पन्न होता है।