Bhagavad Gītā · 2.59
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️इन्द्रियों के द्वारा विषयों को ग्रहण न करने वाले पुरुष के भी केवल विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, परंतु उनमें रहने वाली आसक्ति निवृत्त नहीं होती|
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।