Bhagavad Gītā · 2.56
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️दुःखों की प्राप्ति होने पर जिसके मन में उद्वेग नहीं होता, सुखों की प्राप्ति में जो सर्वथा निःस्पृह है तथा जिसके राग, भय और क्रोध नष्ट हो गये हैं, ऐसा मुनि स्थिर बुद्धि कहा जाता है |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱दुःखों में व्याकुल न होना और सुखों में आसक्त न होना ही स्थिर बुद्धि (मानसिक परिपक्वता) की पहचान है।