Bhagavad Gītā · 2.55
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
श्रीभगवानुवाच प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान् आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️श्री भगवान ने कहा—हे अर्जुन! जिस काल में यह पुरुष मन में स्थित सम्पूर्ण कामनाओं को भलीभाँति त्याग देता है और आत्मा से आत्मा में ही सन्तुष्ट रहता है, उस काल में स्थित प्रज्ञ कहा जाता है |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।