ॐ
DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 2.57
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

यः सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम् नाभिनन्दति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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जो पुरुष सर्वत्र स्नेहरहित हुआ उस-उस शुभ या अशुभ वस्तु को प्राप्त होकर न प्रसन्न होता है और न द्वेष करता है उसकी बुद्धि स्थिर है |

जीवन-पाठLife Lesson
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परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।