ॐ
DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 2.50
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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समबुद्धि युक्त पुरुष पुण्य और पाप दोनों को इसी लोक में त्याग देता है अर्थात् उनसे मुक्त हो जाता है। इससे तू समत्व रूप योग में लग जा; यह समत्व रूप योग ही कर्मों में कुशलता है अर्थात् कर्मबन्धन से छुटने का उपाय है |

जीवन-पाठLife Lesson
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परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।