Bhagavad Gītā · 2.49
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
दूरेण ह्यवरं कर्म बुद्धियोगाद्धनञ्जय बुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणाः फलहेतवः
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️इस समत्वरूप बुद्धियोग से सकाम कर्म अत्यन्त ही निम्न श्रेणी का है। इसलिए हे धनञ्जय! तू समबुद्धि में ही रक्षा का उपाय ढूँढ़ अर्थात् बुद्धियोग का ही आश्रय
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।