Bhagavad Gītā · 2.51
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️क्योंकि समबुद्धि से युक्त ज्ञानी जन कर्मों से उत्पन्न होने वाले फल को त्याग कर जन्मरूप बन्धन से मुक्त हो निर्विकार परम पद को प्राप्त हो जाते हैं |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।