ॐ
DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 2.42
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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हे अर्जुन! जो अविवेकीजन वेदों के अतिरिक्त कुछ भी नहीं मानते, वे वेदों की पुष्पित वाणी को कहते हैं।|

जीवन-पाठLife Lesson
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परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।