Bhagavad Gītā · 2.41
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️हे अर्जुन ! इस कर्मयोग में निश्चयात्मिका बुद्धि एक ही होती है; किंतु अस्थिर विचार वाले विवेकहीन सकाम मनुष्यों की बुद्धियाँ निश्चय ही बहुत भेदोंवाली और अनन्त होती हैं |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।