Bhagavad Gītā · 2.33
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️किंतु यदि तू इस धर्म युक्त युद्ध को नहीं करेगा तो स्वधर्म और कीर्ति को खोकर पाप को प्राप्त होगा|
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।