Bhagavad Gītā · 2.32
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम् सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️हे पार्थ! अपने-आप प्राप्त हुए और खुले हुए स्वर्ग के द्वार रूप इस प्रकार के युद्ध को भाग्यवान क्षत्रिय लोग ही पाते हैं|
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।