ॐ
DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 2.31
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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तथा अपने धर्म को देखकर भी तू भय करने योग्य नहीं है यानी तुझे भय नहीं करना चाहिये; क्योंकि क्षत्रिय के लिये धर्मयुक्त युद्ध से बढ़कर दूसरा कोई कल्याणकारी कर्तव्य नहीं है |

जीवन-पाठLife Lesson
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परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।