Bhagavad Gītā · 2.21
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम् कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️हे पुत्रपुत्र अर्जुन! जो पुरुष इस आत्मा को नाशरहित, नित्य, अजन्मा और अव्यय जानता है, वह पुरुष कैसे किसको मरवाता है और कैसे किसको मारता है |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।