DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 2.22
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

वासांसि जीर्णानि यथा विहायनवानि गृह्णाति नरोऽपराणि तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-न्यन्यानि संयाति नवानि देही

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर दूसरे नये वस्त्रों को ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्याग कर दूसरे नये शरीरों को प्राप्त होता है |

जीवन-पाठLife Lesson
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जैसे पुराने वस्त्र बदलकर नए धारण किए जाते हैं, वैसे ही बदलाव को स्वीकार करना जीवन का स्वाभाविक नियम है।