DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 2.2
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

श्रीभगवानुवाच कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम् अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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श्रीभगवान् ने कहा—हे अर्जुन! तुझे इस असमय में यह मोह किस हेतु से प्राप्त हुआ? क्योंकि न तो यह श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा आचरण है, न स्वर्ग को देने वाला है और न कीर्तिको करने वाला ही है |

जीवन-पाठLife Lesson
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परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।