DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 1.35
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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हे मधुसूदन! मुझे मारने पर भी अथवा तीनों लोकों के राज्य के लिये भी मैं इन सबको मारना नहीं चाहता; फिर पृथ्वी के लिये तो कहना ही क्या है?|

जीवन-पाठLife Lesson
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कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है।