Bhagavad Gītā · 1.33
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️हमें जिनके लिये राज्य, भोग और सुखादि अभिष्ट हैं; वे ही ये सब धन और जीवन की आशा को त्याग कर युद्ध में खड़े हैं|
जीवन-पाठLife Lesson
🌱कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है।