DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 1.32
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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हे कृष्ण ! मैं न तो विजय चाहता हूँ और न राज्य तथा सुखों को ही । हे गोविन्द ! हमें ऐसे राज्य से क्या प्रयोजन है अथवा ऐसे भोगों से और जीवन से भी क्या लाभ है ? |

जीवन-पाठLife Lesson
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कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है।