Bhagavad Gītā · 1.20
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान् कपिध्वजः प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️अथ व्यवस्थित धार्तराष्ट्रों को कपिध्वज (अर्जुन) ने देखा, जब वे शस्त्रों से सुसज्जित हो गए, तब धनुष उठाकर पाण्डव ने युद्ध की तैयारी की। हे राजन् ! इसके बाद कपिध्वज अर्जुन ने मोर्चा बाँधकर डटे हुए धृतराष्ट्र-सम्बन्धियों को देखकर, उस शत्रु चलने की तैयारी के समय धनुष उठाकर हृषीकेश श्रीकृष्ण महाराज से यह वचन कहा—हे अच्युत ! मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा कीजिये |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है।