Bhagavad Gītā · 1.18
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️राजा द्रुपद एवं द्रौपदी के पाँचों पुत्र और बड़ी भुजावाले सुभद्रा पुत्र अभिमन्यु—इन सभी ने, हे राजन्! सब और से अलग-अलग शंख बजाये |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है।