Bhagavad Gītā · 2.53
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️भाँति-भाँति के वचनों को सुनने से विचलित हुई तेरी बुद्धि जब परमात्मा में अचल और स्थिर ठहर जायेगी, तब तू योग को प्राप्त हो जायेगा अर्थात तेरा परमात्मा से नित्य संयोग हो जायेगा |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।