ॐ
DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 2.44
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम् व्यवसायात्मिका बुद्धिः समाधौ न विधीयते

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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भोग और ऐश्वर्य में अत्यन्त आसक्त उन पुरुषों की परमात्मा में निश्चयात्मक बुद्धि नहीं होती।|

जीवन-पाठLife Lesson
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परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।