Bhagavad Gītā · 2.4
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
अर्जुन उवाच कथं भीष्ममहं सङ्ख्ये द्रोणं च मधुसूदन इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️अर्जुन ने कहा— हे मधुसूदन! मैं रणभूमि में किस प्रकार वाणों से भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य के विरुद्ध लड़ूँगा? क्योंकि हे अरिसूदन! वे दोनों ही पूजनीय हैं|
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।