Bhagavad Gītā · 2.36
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
अवाच्यवादांश्च बहून्वदिष्यन्ति तवाहिताः निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️तेरे वैरी लोग तेरे सामर्थ्य की निन्दा करते हुए तुझे बहुत-से न कहने योग्य वचन भी कहेंगे; उससे अधिक दुःख और क्या होगा|
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।