Bhagavad Gītā · 2.28
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️हे अर्जुन! सम्पूर्ण प्राणी जन्म से पहले अप्रकट थे और मरने के बाद भी अप्रकट हो जाने वाले हैं; केवल बीच में प्रकट हैं; फिर ऐसी स्थिति में क्या शोक करना है?|
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।