DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 2.27
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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क्योंकि इस मान्यता के अनुसार जन्मे हुए की मृत्यु निश्चित है और मरे हुए का जन्म निश्चित है। इससे भी इस बिना उपाय वाले विषय में तू शोक करने के योग्य नहीं है|

जीवन-पाठLife Lesson
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परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।