Bhagavad Gītā · 2.25
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️यह आत्मा अव्यक्त है, यह आत्मा अचिन्त्य है और यह आत्मा विकाररहित कहा जाता है। इससे हे अर्जुन! इस आत्मा को उपयुक्त प्रकार से जानकर तू शोक करने के योग्य नहीं है अर्थात तुझे शोक करना उचित नहीं है |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।