Bhagavad Gītā · 1.47
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
सञ्जय उवाच एवमुक्त्वार्जुनः सङ्ख्ये रथोपस्थ उपाविशत् विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️संजय ने कहा— रणभूमि में शोक से उद्विग्न मन वाला अर्जुन इस प्रकार कहकर वाणसहित धनुष को त्यागकर रथ के पीछे भाग में बैठ गया |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है।