DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 1.41
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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हे कृष्ण! पाप के अधिक बढ़ जाने से कुल की स्त्रियाँ अत्यन्त दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय! स्त्रियों के दूषित हो जाने पर वर्णसंकर उत्पन्न होता है |

जीवन-पाठLife Lesson
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कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है।