Bhagavad Gītā · 1.28
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत् अर्जुन उवाच दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️अर्जुन ने कहा—हे कृष्ण ! युद्ध क्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इस स्वजन समुदाय को देखकर मेरे अंग शिथिल हुए जा रहे हैं और मुख सूखा जा रहा है तथा मेरे शरीर में कम्प एवं रोमाञ्च हो रहा है ।। २८वेंका उत्तरार्ध और २६ ।।
जीवन-पाठLife Lesson
🌱अत्यधिक मोह और भ्रम मनुष्य के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर देते हैं।