Bhagavad Gītā · 1.27
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️उन उपस्थित सम्पूर्ण बन्धुओं को देखकर वह कुत्तीपुत्र अर्जुन अत्यन्त करुणा से युक्त होकर शोक करते हुए यह बचन ने कहा ।। २७वेंका उत्तरार्ध और २८वेंका पूर्वार्ध ।।
जीवन-पाठLife Lesson
🌱कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है।