ॐ
DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 2.46
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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सब ओर से परिपूर्ण जलाशय के प्राप्त हो जाने पर छोटे जलाशय में मनुष्य का जितना प्रयोजन रहता है, ब्रह्म को तत्व से जानने वाले ब्राह्मण का समस्त वेदों में उतना ही प्रयोजन रह जाता है|

जीवन-पाठLife Lesson
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परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।