Bhagavad Gītā · 2.39
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
एषा तेऽभिहिता साङ्ख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️हे पार्थ! यह बुद्धि तेरे लिये ज्ञान योग के विषय में कही गयी और अब तू इसको कर्मयोग के विषय में सुन कि जिस बुद्धि से युक्त हुआ तू कर्मों के बन्धन को भलीभाँति त्याग देगा यानि सर्वथा नष्ट कर डालेगा |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है।