DAILY GITA
श्रीमदभगवद्‌गीता यथारूप
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Bhagavad Gītā · 1.45
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥

अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम् यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः

arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
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हा ! शोक ! हम लोग बुद्धिमान होकर भी महान् पाप करने को तैयार हो गये हैं, जो राज्य और सुख के लोभ से स्वजनों को मारने के लिये उद्यत हो गये हैं |

जीवन-पाठLife Lesson
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कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है।