Bhagavad Gītā · 1.24
☸️Karma Yoga
॥ श्लोक ॥
सञ्जय उवाच एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्
arth & jeevan-path
हिन्दी अर्थMeaning
🗣️सज्जय ने कहा—हे धृतराष्ट्र! अर्जुन द्वारा इस प्रकार कहे हुए महाराज श्रीकृष्ण चन्द्र ने दोनों सेनाओं के बीच में भीष्म और द्रोणाचार्य के सामने तथा सम्पूर्ण राजाओं के सामने उत्तम रथ को खड़ा करके इस प्रकार कहा कि हे पार्थ! युद्ध के लिये जुटे हुए इन कौरवों को देख |
जीवन-पाठLife Lesson
🌱कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है।